Tuesday, November 27, 2018

洞察号登陆火星 人类有望了解火星内部

美国宇航局(NASA)一个名为洞察号(InSight)的新机器人已成功在火星登陆。这款探测器旨在研究火星的深层内部,并使其成为除了地球之外唯一一个以这种方式进行检测的星球。

洞察号于格林威治标准时间11月26日19:53确认着陆成功,此后向地球发送了一系列关于其着陆后的更新信息。

当有清晰迹象表明洞察者号已经安全着陆时,美国宇航局的任务小组在加利福尼亚喷气推进实验室(JPL)爆发出一阵欢呼声。

NASA首席行政官布莱登斯汀(James Bridenstine)称之为“令人惊叹的一天”。他告诉记者,特朗普总统已打电话表示祝贺。 JPL主任沃特金斯(Mike Watkins)说,此次发射成功说明“我们做科学必须大胆,必须成为探险家”。

这块平原的第一张照片在洞察号登陆几分钟后就被传回地球。照片以鱼眼视图显示了机器人周围环境的污迹。

照片是通过位于着陆器下侧的摄像机的半透明镜头盖拍摄的。下降的尘埃掩盖了大部分场景,但仍然可以看出一块小石头、探测器的一只脚以及地平线上的天空。

预计未来几天将拍摄更好的照片

着陆时发生了什么?
跟之前在火星上的所有登陆尝试一样,洞察号的登陆也很惊险。这是2012年以来的首次尝试。

这个探测器一步一步、一米一米地报告了它的进展情况

它进入大气层的速度比高速子弹还快,使用了隔热屏障、降落伞以及火箭,以相对缓慢停下。

洞察号能否在火星表面持续生存的关键是它的太阳能电池板的部署,这些太阳能电池板是为了下降而存放的。

Monday, November 26, 2018

मुठभेड़ में आतंकी को जिंदा पकड़ा, गोली नहीं चलाई

जम्मू-कश्मीर में सेना ने आतंकी बने एक स्थानीय युवक के परिवार से किया गया वादा निभाया और उसे जिंदा पकड़ लिया। रविवार शाम सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि पुलवामा जिले के अवंतिपोरा में दो आतंकी छिपे हैं। इनमें एक स्थानीय युवक और दूसरा जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा पाकिस्तानी है। मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने पाकिस्तानी आतंकी को ढेर कर दिया था। जबकि स्थानीय आतंकी सोहेल लोन को जिंदा पकड़ लिया।

लेफ्टिनेंट कर्नल समर राघव ने बताया, सोहेल चार महीने पहले आतंकी संगठन से जुड़ा था। उसकी मां और बहन ने उससे घर वापस आने की अपील की थी। सेना ने परिवार से वादा किया था कि उसे जिंदा पकड़ेंगे। मुठभेड़ के दौरान सोहेल और उसके साथी आतंकी ने सुरक्षबलों पर फायरिंग की।  इसके बावजूद जवानों ने संयम दिखाते हुए उसे जिंदा पकड़ लिया।

सुरक्षाबल एक महीने से रख रहे थे नजर
लेफ्टिनेंट कर्नल ने बताया कि पिछले एक महीने से गतिविधियों पर नजर रख रहे थे और बिजनारी इलाके में घेरा बंदी कर रखी थी। जैश-ए-मोहम्मद के कई ग्राउंड वर्कर भी गिरफ्तार किए गए। उनसे पाक आतंकी और सोहेल की लोकेशन का पता चला था। सुरक्षाबलों ने सोहेल को पुलिस के हवाले कर दिया। आतंकियों के पास से एके-47, राइफल, तीन आतंकी, 2 ग्रेनेड, 1 पिस्टल, और 2 मैगजीन मिली हैं

जम्मू-कश्मीर के शोपियां में सुरक्षाबलों ने रविवार को मुठभेड़ में छह आतंकियों को मार गिराया। सेना के नायक नजीर अहमद शहीद हो गए। सुरक्षाबलों को हिपुरा बाटागुंड इलाके में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया। पुलिस के मुताबिक, मारे गए चार आतंकी हिजबुल मुजाहिदीन और दो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे। इनमें दोनों आतंकी संगठन के डिस्ट्रिक्ट कमांडर शामिल हैं। एक आतंकी पाकिस्तान से है।

एसएसपी संदीप चौधरी ने बताया कि आतंकियों के कब्जे से भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद हुआ है। उनकी पहचान उमर मजीद गनी, मुश्ताक अहमद मीर, मोहम्मद अब्बास भट, मोहम्मद वसीम वगई, खालिद फारूक मली के रूप में हुई। उमर गनी बाटमालू एनकाउंटर के दौरान बच निकला था। पिछले दिनों उसकी तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें उमर लाल चौक के आसपास नजर आया था। बीते दो साल में वह कई जवानों और आम नागरिकों की हत्या में शामिल रहा था।

सुरक्षाबलों के काफिले पर हुआ पथराव

सुरक्षाबलों की कार्रवाई के मद्देनजर शोपियां में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। इसके बाद भी प्रदर्शनकारियों ने मुठभेड़ के बाद लौट रहे जवानों के काफिले पर पथराव किया। जवाबी कार्रवाई में कुछ पथरबाज जख्मी हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

Monday, November 12, 2018

वो सैन्य अभ्यास जो दुनिया ख़त्म कर सकता था

ये बात 7 नवंबर 1983 की है. 100 के क़रीबी सीनियर सैन्य अधिकारी नेटो के ब्रसेल्स स्थित मुख्यालय में जुटे. उनका मक़सद था तीसरा विश्व युद्ध 'लड़ना'.

ये 'लड़ाई' वो हर साल करते थे. इसका नाम था 'एबल आर्चर'. ये एक युद्धाभ्यास था, जो नेटो देशों की सेनाएं करती थीं, ताकि वक़्त आने पर सोवियत संघ की सेना का मुक़ाबला कर सकें. और एबल आर्चर युद्धाभ्यास, परंपरागत युद्ध की वर्जिश 'ऑटम फोर्ज' के आख़िर में होता था.

इसमें नेटो देशों की हज़ारों सैन्य टुकड़ियां पश्चिमी यूरोप में होने वाले युद्धाभ्यास में हिस्सा लेती थीं.

जिस वक़्त 'एबल आर्चर 83' युद्धाभ्यास हो रहा था, तब शीत युद्ध चरम पर था.

नेटो देशों के संबंध वारसॉ पैक्ट के देशों यानी सोवियत संघ के समर्थक देशों से बहुत ख़राब हो गए थे. उसी साल की शुरुआत में अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने सोवियत संघ को 'शैतान का साम्राज्य' कहा था.

1983 के सितंबर महीने में ही सोवियत संघ के पायलटों ने अपनी सीमा में घुस आए कोरियन एयरलाइंस के एक नागरिक विमान को मार गिराया था. इसमें विमान में सवार सभी 269 लोग मारे गए थे.

लोहे की दीवार के दोनों तरफ़ मध्यम दूरी तक मार करने वाले एटमी हथियार तैनात किए जा रहे थे.

ब्रिटेन में इसी दौर में ग्रीनहैम कॉमन इलाक़े में एटमी मिसाइलें तैनात की गई थीं. ये मिसाइलें और एटमी हथियार, लॉन्च होने के पांच मिनट के अंदर अपने निशाने को तबाह कर सकती थीं.

कुल मिलाकर दुनिया विनाश लाने वाले एटमी जंग की कगार पर खड़ी थी.

क्या हुआ था काल्पनिक सैन्य अभ्यास में?

'एबल आर्चर 83' युद्धाभ्यास में जिस जंग की कल्पना की गई थी, उसकी शुरुआत अरब देशों में उठा-पटक से होनी थी.

इसकी वजह से सोवियत संघ को तेल की सप्लाई में बाधा आई थी. वहीं, युगोस्लाविया, जो गुटनिरपेक्ष देश था, वो पश्चिमी देशों के खेमे में चला जाता है.

इस वॉरगेम में सोवियत संघ के नेताओं को इस डर का शिकार होते दिखाया गया था कि युगोस्लाविया के पश्चिमी खेमे में जाने से दूसरे देश भी सोवियत संघ का साथ छोड़कर जा सकते हैं.

वो वार्सा पैक्ट छोड़कर नेटो में शामिल हो सकते हैं. इससे कम्युनिस्ट देशों की पूरी व्यवस्था चरमराकर तबाह होने का डर सोवियत नेताओं को दिख रहा था.

कल्पना का युद्ध
कल्पना का ये युद्ध उस वक़्त शुरू हुआ, जब सोवियत संघ के टैंक युगोस्लाविया में घुस आए.

इसके बाद स्कैंडिनेवियाई देशों यानी डेनमार्क, नॉर्वे और स्वीडन पर सोवियत सेनाओं ने हमला बोला. जल्द ही सोवियत सेनाएं पश्चिमी यूरोपीय देशों में दाखिल होने लगी थीं. दबाव में नेटो देशों की सेनाओं को पीछे हटना पड़ा.

कुछ महीने बाद ये काल्पनिक जंग फिर से शुरू हो गई. पश्चिमी देशों के नेताओं ने सोवियत संघ के ख़िलाफ़ एटमी हथियारों के इस्तेमाल की इजाज़त दे दी.